:
Breaking News

Bihar Politics: जीतन राम मांझी ने SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल की उठाई मांग, पूना समझौते पर भी रखी राय

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने SC-ST के लिए अलग निर्वाचक मंडल की मांग उठाई है। उन्होंने पूना समझौते, आरक्षण और दलित समाज की स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कई राजनीतिक बयान दिए।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में एक बार फिर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने SC-ST समुदाय के लिए अलग निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की मांग उठाते हुए कहा कि यदि वर्ष 1932 में डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया होता तो आज दलित समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति कहीं अधिक मजबूत होती।

पटना में पार्टी की राज्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए मांझी ने कहा कि स्वतंत्रता के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनुसूचित जातियों की साक्षरता और सामाजिक स्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उनका कहना था कि अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था होने पर SC-ST समुदाय अपने प्रतिनिधियों का चुनाव स्वयं करता और इससे उनकी वास्तविक भागीदारी तथा नेतृत्व मजबूत होता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आरक्षित सीटों पर सभी वर्गों के मतदाता मतदान करते हैं, जिसके कारण प्रभावशाली वर्गों का प्रभाव निर्वाचित प्रतिनिधियों पर बना रहता है। उन्होंने दावा किया कि इसका असर दलित समाज के विकास पर भी पड़ा है और आज भी बड़ी संख्या में लोग मजदूरी करने को मजबूर हैं।

अपने संबोधन में मांझी ने वर्ष 1932 के पूना समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बीच अलग निर्वाचक मंडल को लेकर मतभेद था, जिसके बाद पूना समझौते के तहत अलग निर्वाचक मंडल के बजाय आरक्षित सीटों पर सभी मतदाताओं को मतदान का अधिकार देने की व्यवस्था लागू हुई। मांझी का दावा था कि उस समय डॉ. आंबेडकर को अपनी मूल मांग से पीछे हटना पड़ा था।

आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने बिना किसी का नाम लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक दलित नेता पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग खुद को आरक्षण का सबसे बड़ा रक्षक बताते हैं, जबकि वास्तविकता अलग है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, तब तक आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती।

बैठक के दौरान जीतन राम मांझी ने अपने पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन को भी सार्वजनिक जीवन में अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में अपनी बात मजबूती से रखने वाले नेताओं को अधिक पहचान मिलती है और जनता के बीच सक्रिय संवाद आवश्यक है।

मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में अलग निर्वाचक मंडल और आरक्षण को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू होने के आसार हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उनके इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: • बिहार राजनीति की बड़ी खबरें – Alam Ki Khabar • सम्राट चौधरी से जुड़ी खबरें – Alam Ki Khabar • बिहार सरकार की ताजा खबरें – Alam Ki Khabar • पटना की प्रमुख खबरें – Alam Ki Khabar

संपादकीय: अलग निर्वाचक मंडल का मुद्दा भारत के संवैधानिक और राजनीतिक इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस पर समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता अपनी राय रखते रहे हैं। ऐसे बयानों पर लोकतांत्रिक विमर्श होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले संवैधानिक प्रावधानों, ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *